Friday, September 6, 2013

जाने अर्धनारेश्वर शिव चित्र के बारे में




जाने अर्धनारेश्वर शिव चित्र के बारे में
अर्धनारेश्वर शिव चित्र मतलब आधे शिव और आधी पार्वती जी का चित्र जो हम सभी ने देखा और सुना | सभी पूजते है इस चित्र को सनातन  धर्मं  में | लेकिन क्या कभी जानने कि कोशिश कि क्या ये चित्र भी हमे कुछ बताता है ?
 सनातन  धर्मं  में एक भी चित्र से लेकर वेद  पुराण  तक सभी में ज्ञान है हमारे  जीवन को चलाने के लिए बस बात है समझने कि और समझाने कि कैसे पता चले उस ज्ञान के बारे में जो हमें हमारे शरीर को स्वस्थ रखे |
अब जानते है अर्धनारेश्वर चित्र के दाहिने और माँ पार्वती के चित्र से....
माँ पार्वती स्त्री का प्रतिनिधित्व कर रही है स्त्री जो पूजनीय है जो प्रथम है जो जननी है
माँ पार्वती का आधा भाग यह दर्शाता है कि जीवन में पहले एक स्त्री के गुणों को जीवन में अमल में लाना चाहिये  और उसके बाद पुरुष  के चरित्र और गुणों को ...
स्त्री के मस्तिष्क :- स्त्री के गुणों का अनुसरण करने से तात्पर्य यह है कि एक स्त्री जो जननी है जो पली और बड़ी हुई किसी और घर में और अपने जीवन का आधे से ज्यादा समय किसी और के यहाँ बिता देती है और अपने  मस्तिष्क के अनुरूप काम लेकर उस घर में अपने को ढाल लेती है जैसा वहा का वातावरण होता है |
अगर हम भी यानि सभी अपने जीवन में कभी  अनजानी और अपरचित जगह जाते है तो एक स्त्री के मष्तिष्क कि तरह काम लेकर वहा के अनुरूप ढल जाय | ताकि हम उस वातावरण में रहकर कार्य कर सके |
स्त्री के नेत्र कि तरह :- एक स्त्री के नेत्र विषम परिस्थितयों में ही क्रोध से भरे दिखाई देते है नहीं तो एक स्त्री हमेशा प्रेम स्नेह और ममतापूर्ण नेत्रों से देखती है दयालुता सम्मान उसके नेत्रों में दिखाई पड़ती है  | तो हमे भी अपने जीवन में स्त्री नेत्रों कि तरह ही प्यार और सम्मान से लोगो को देखना चाहिए |
स्त्री के कान :- एक स्त्री ससुराल में अपने कानो से सब कुछ सुनकर वहा पर सामंजस्य बनाकर रखती है | स्त्री के कान सब कुछ सुन कर भी सहन करने कि क्षमता रखते है विशेष परिस्थितियों में ही उसे बोलने कि जरुरत पड़ती है | तो हमे भी सर्व प्रथम अपने  कानो को स्त्री के कानो कि तरह ही इस्तेमाल  करना चाहिए |
स्त्री मुख :- स्त्री मुख से निकलने वाले बोल भी कोमल और स्नेह से भरे होते है ,कभी भी असहज लगने वाले सब्दो का प्रयोग नहीं करती है स्त्रिया | इसलिए  हमे भी अपने मुख से क्रोधी और असहज  लगने वालो शब्दों का प्रयोग न करना स्त्री मुख से सीखना चाहिए या उनका अनुसरण करना चाहिए |
अगर हम क्रोधित होते  है को कई लोग क्रोधित होते है और क्रोध नाश का कारण होता है और मुख ही शुभ और अशुभ संकेत दे जाता है |
स्त्री ह्रदय :- स्त्री का ह्रदय कोमल दया से भरा प्यार और स्नेह  लिए हुए होता है ईर्ष्या  और बदले कि भावना उसके दिल में नहीं होती है वो तो परोपकारी  ह्रदय कि स्वामी होती है जिसको देना आता है | माँ बहन पत्नी और बेटी इसका उदाहरण है हमे भी जीवन में पहले स्त्री ह्रदय से काम लेना चाहिए |
स्त्री के हाथ और पैर  :- स्त्री के हाथ और पैर  हमेशा दूसरो कि मदद और सेवा के लिए उठते है जिनमे स्वार्थ और बदले कि भावना तनिक भी नहीं होती है हमे भी अपने हाथ और पैर में स्त्री के हाथ और पैर  के गुण रखने चाहिए |
इन स्त्री गुणों को हमे अपने जीवन मे पहले अपनाना चाहिए जिसके बाद शिव यानि पुरुष गुणों को जीवन में लाना चाहिए |
चित्र के बाई और शिव स्वरुप ईश्वर  यानि पुरुष कर प्रतिनिधित्व कर रहे है | जो जीवन में स्त्री आचरण के बाद पुरुष आचरण को लाने का सन्देश देते है |
पुरुष का मष्तिष्क :- पुरुष मष्तिष्क तीव्र गति से सोचने वाला तीव्र निर्णय लेने वाला और समय और परिस्थित के अनुसार व्यवहार करने वाला होता है अतः हमे पुरुष मष्तिष्क का अनुसरण स्त्री मस्तिष्क के उपरांत करना चाहिए |
पुरुष नेत्र :-पुरुष नेत्रों में कठोरता क्रोध ज्यादा और  भावुकता कम ही होती है | अतः हमे समय और परिस्थित के अनुसार पुरुष नेत्रों का इस्तेमाल करना चाहिए |
पुरुष कान :- पुरुषो के कान  ज्यादा गंभीर और ज्यादा देर तक सहन नहीं कर सकते है | अतः हमे समय और परिस्थित के अनुसार पुरुष कानो का इस्तेमाल करना चाहिए |
पुरुष मुख :-स्त्री मुख कि अपेक्षा पुरुष मुख से कोमल व स्नेही शब्द कम ही निकलते है अतः हमे समय और परिस्थित के अनुसार पुरुष मुख का इस्तेमाल  करना चाहिए |
पुरुष ह्रदय :- पुरुष  ह्रदय कठोर होता है उसमे स्त्री ह्रदय कि तरह भावना  कम होती है | यहाँ पर भी हमे समय और परिस्थित के अनुसार पुरुष ह्रदय को अपना लेना चाहिए |
पुरुष के हाथ और पैर :- पुरुष के हाथ बलशाली और पैर तीव्र गति लिए होते है जो जरूरत पडने पर हमेशा  मजबूती प्रदान करते है अतः स्त्री के हाथ और पैरो के गुणों के बाद आवश्यकता पडने पर पुरुष के  हाथ और पैरो कि तरह ही आचरण करना चाहिए |
भगवन शिव  जिनका प्रतिनिधित्व कर रहे है  जो पालनकर्ता है जो विघ्नहर्ता है जो कर्ता  है | उनका अनुसरण करना चाहिए |

पंडित आशीष त्रिपाठी 
ज्योतिषाचार्य 

Posted By KanpurpatrikaFriday, September 06, 2013